नए एंटी पेपर लीक कानून के बाद एग्जाम सिस्टम और छात्रों के लिए क्या-क्या बदल जाएगा?
10 साल की जेल, 10 करोड़ तक जुर्माना... जानिए क्या है नया एंटी-पेपर लीक कानून?
जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और देश में लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों के बीच पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। NEET-UG समेत कई प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों के बाद सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान किए हैं। 2024 में लागू हुए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य तरह की धांधली को रोकना है। (AajTak)
इस कानून के तहत प्रश्नपत्र या आंसर की लीक करना, परीक्षा से पहले अनधिकृत तरीके से प्रश्नपत्र हासिल करना, उम्मीदवार को अनुचित तरीके से मदद पहुंचाना, उत्तर पुस्तिका में छेड़छाड़ करना और परीक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी गतिविधियों को अपराध माना गया है। कानून में परीक्षा कराने वाली एजेंसियों से जुड़े सेवा प्रदाताओं और अन्य लोगों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। (India Code)
कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी सजा है। परीक्षा में संगठित तरीके से गड़बड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। अलग-अलग अपराधों और परिस्थितियों के अनुसार जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक माफिया और परीक्षा में संगठित धांधली करने वाले नेटवर्क पर आर्थिक और कानूनी दबाव बढ़ाना है। (India Code)
हालांकि, आम छात्रों को लेकर भी एक अहम बात है। कानून का मुख्य निशाना पेपर लीक और परीक्षा में संगठित अनुचित साधनों में शामिल लोग हैं। वहीं परीक्षा में नकल करने वाले उम्मीदवारों पर संबंधित परीक्षा एजेंसी के नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। (AajTak)
अब सवाल यह है कि कड़े कानून के बाद क्या पेपर लीक की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग पाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुरक्षा, गोपनीयता और निगरानी को भी मजबूत करना जरूरी है। (AajTak)